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डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग: कारण, अवधि और देखभाल के उपाय

| Last Updated: April 23, 2026

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग और लोचिया की देखभाल नई माँ के लिए पोस्टपार्टम रिकवरी
WHO-GMP CertifiedTrusted by 5M+ Families25+ Years ExpertiseFact Checked

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग यानी रक्तस्राव, जिसे चिकित्सा भाषा में लोचिया (lochia) कहते हैं, प्रसव के बाद शरीर की स्वाभाविक रिकवरी प्रक्रिया का हिस्सा है। WHO के अनुसार लगभग हर महिला को प्रसव के बाद कुछ हद तक रक्तस्राव होता है, जो आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह में धीरे-धीरे कम होता है। यह गर्भाशय से प्लेसेंटा के अलग होने के बाद खुली रक्त वाहिनियों से निकलता है। हालाँकि यह सामान्य है, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव पोस्टपार्टम हेमरेज का संकेत हो सकता है, जिसमें तुरंत चिकित्सा ज़रूरी है। इस लेख में जानिए कि प्रसव के बाद रक्तस्राव क्यों होता है, कितने दिन तक रहता है और इसे नियंत्रित करने के लिए क्या करें।

Key Takeaways

About This TopicThis article is reviewed by baby care specialists at Teddyy Diapers, backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd with over 20 years of expertise in infant hygiene products certified by WHO and GMP standards.
  • प्रसव के बाद ब्लीडिंग (lochia) सामान्यतः 4–6 सप्ताह तक रहता है और तीन चरणों में बदलता है — लाल, गुलाबी और सफेद।
  • गर्भाशय की मालिश, स्तनपान और पर्याप्त आराम रक्तस्राव कम करने में सबसे प्रभावी प्राकृतिक तरीके हैं।
  • एक घंटे में एक से अधिक पैड भीगना, बड़े खून के थक्के निकलना, बुखार, या चक्कर आना हेमरेज के लक्षण हैं — तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • घरेलू उपाय केवल सामान्य लोचिया के लिए हैं; अत्यधिक खून बहने पर घरेलू उपचार नहीं, तुरंत चिकित्सा ज़रूरी है।

डिलीवरी के बाद रक्तस्राव क्यों होता है

प्रसव के दौरान प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से जुड़ा होता है। बच्चे के जन्म के बाद जब प्लेसेंटा अलग होता है, तो उस जगह से ब्लीडिंग शुरू होती है। इसके प्रमुख कारण हैं:

प्लेसेंटा का पूरी तरह अलग न होना

कभी-कभी प्लेसेंटा का कुछ हिस्सा गर्भाशय में रह जाता है, जिससे लगातार रक्तस्राव होता रहता है। ACOG के अनुसार यह पोस्टपार्टम हेमरेज का एक प्रमुख कारण है।

गर्भाशय का संकुचन न होना

प्रसव के बाद गर्भाशय को सिकुड़कर अपने पहले के आकार में लौटना चाहिए। जब यह संकुचन ठीक से नहीं होता, तो खुली रक्त वाहिनियों से ब्लीडिंग होती रहती है। इसे यूटेराइन एटोनी कहते हैं।

संक्रमण या चोट

प्रसव के दौरान या बाद में गर्भाशय या प्रजनन नलिका में संक्रमण हो सकता है, जिससे रक्तस्राव बढ़ जाता है और बुखार हो सकता है।

लोचिया के चरण और अवधि

प्रसव के बाद गर्भाशय से निकलने वाली ब्लीडिंग को लोचिया (lochia) कहते हैं। यह तीन चरणों में बदलता है:

लोचिया रूब्रा (1–5 दिन)

शुरुआती दिनों में गहरे लाल रंग का रक्तस्राव होता है। इसमें रक्त, गर्भाशय की परत के टुकड़े और श्वेत रक्त कोशिकाएँ शामिल होती हैं। यह सबसे तीव्र चरण है और पैड बार-बार बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है।

लोचिया सेरोसा (5–10 दिन)

इस चरण में रंग गुलाबी या भूरा हो जाता है। खून की मात्रा कम होती है और रक्तस्राव धीरे-धीरे पतला होता है। इसमें मुख्य रूप से सीरम और श्वेत रक्त कोशिकाएँ होती हैं।

लोचिया अल्बा (10 दिन से 4–6 सप्ताह)

अंतिम चरण में रंग पीला या सफेद हो जाता है। यह दर्शाता है कि गर्भाशय ठीक हो रहा है। अगर 6 सप्ताह के बाद भी खून बहना बंद न हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

पोस्टपार्टम हेमरेज के लक्षण और चेतावनी संकेत

सामान्य ब्लीडिंग और पोस्टपार्टम हेमरेज में फर्क समझना बहुत ज़रूरी है। हेमरेज का मतलब है प्रसव के 24 घंटों में 500 मिली से अधिक खून बहना (सीजेरियन में 1000 मिली से अधिक)। इन लक्षणों पर ध्यान दें:

  • एक घंटे में एक से अधिक मैटर्निटी पैड भीगना
  • गोल्फ की गेंद से बड़े खून के थक्के आना
  • तेज़ धड़कन, चक्कर आना या धुंधली दिखना
  • बुखार, उल्टी या बेहोशी
  • 6 सप्ताह के बाद भी गहरा लाल रक्तस्राव होना
  • बदबूदार डिस्चार्ज या तेज़ बुखार

महत्वपूर्ण: इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। पोस्टपार्टम हेमरेज एक आपातकालीन स्थिति है।

प्रसव के बाद रिकवरी के दौरान आराम करती माँ

सामान्य रक्तस्राव और हेमरेज में अंतर

सामान्य लोचिया और हेमरेज के लक्षणों की तुलना
संकेत/लक्षण सामान्य लोचिया हेमरेज (अत्यधिक रक्तस्राव)
रक्त का रंग लाल → गुलाबी → पीला/सफेद गहरा लाल, रंग नहीं बदलता
मात्रा धीरे-धीरे कम होती है बहुत अधिक, कम नहीं होती
थक्के छोटे या नहीं बड़े, गोल्फ की गेंद से बड़े
अवधि 4–6 सप्ताह में धीरे बंद 24 घंटों के भीतर तीव्र
अन्य लक्षण हल्की क्रैम्पिंग चक्कर, तेज़ धड़कन, बेहोशी

रक्तस्राव कम करने के प्राकृतिक तरीके

प्रसव के बाद शरीर की रिकवरी और ब्लीडिंग कम करने में कुछ प्राकृतिक तरीके मददगार होते हैं:

गर्भाशय की मालिश

पेट के निचले हिस्से में गर्भाशय को हल्के हाथ से दबाएं। इससे गर्भाशय में संकुचन होता है, जिससे खुली रक्त वाहिनियाँ सिकुड़ती हैं और ब्लीडिंग कम होती है। अस्पताल में नर्स आपको इसका तरीका सिखा सकती हैं।

स्तनपान

स्तनपान से शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन बनता है, जो गर्भाशय को सिकोड़ने और ब्लीडिंग कम करने में मदद करता है। जितना अधिक स्तनपान कराएंगी, गर्भाशय उतनी जल्दी अपने पहले के आकार में लौटेगा।

पर्याप्त आराम और हाइड्रेशन

प्रसव के बाद शरीर को ठीक होने के लिए आराम बहुत ज़रूरी है। भारी सामान न उठाएं, सीढ़ियाँ न चढ़ें और पर्याप्त पानी पिएं। निर्जलीकरण से शरीर में खून की कमी पूरी होती है, इसलिए आयरन और प्रोटीन से भरपूर आहार लें।

पैड और स्वच्छता का ध्यान

मैटर्निटी पैड नियमित रूप से बदलें और साफ-सफाई का ध्यान रखें। संक्रमण से बचने के लिए सूती के कपड़े पहनें और हर बार शौचालय जाने के बाद हाथ धोएं।

घरेलू उपाय

❗ महत्वपूर्ण चेतावनी: ये घरेलू उपाय केवल सामान्य लोचिया के दौरान सहायक हैं। अगर आपको अत्यधिक ब्लीडिंग, बड़े थक्के, बुखार या चक्कर आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें — घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें।

अजवाइन का पानी

एक चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में उबालकर छान लें। इसे दिन में एक बार गुनगुना पी सकती हैं। अजवाइन गर्भाशय के संकुचन में मदद करती है और पाचन में सुधार लाती है।

हल्दी वाला दूध

रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो शरीर की रिकवरी में सहायक है।

अदरक-तुलसी का काढ़ा

अदरक का एक छोटा टुकड़ा और 4–5 तुलसी के पत्ते दो कप पानी में 10 मिनट उबालें। छानकर दिन में एक बार पिएं। यह रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है।

रिकवरी टाइमलाइन: सप्ताह 1 से 6

डिलीवरी के बाद रिकवरी की साप्ताहिक जानकारी
सप्ताह क्या अपेक्षा करें ध्यान देने योग्य बातें
सप्ताह 1 गहरा लाल रक्तस्राव, गर्भाशय संकुचन पूरा आराम ज़रूरी
सप्ताह 2 रक्तस्राव कम होना, पेट में खिंचाव हल्का चलना ठीक, भारी काम न करें
सप्ताह 3 रंग गुलाबी या भूरा पौष्टिक आहार से खून की पूर्ति
सप्ताह 4 रक्तस्राव और कम, छोटे थक्के डॉक्टर की सलाह से हल्की कसरत
सप्ताह 5 लोचिया पीला/सफेद आराम और हल्की सैर
सप्ताह 6 रक्तस्राव लगभग बंद पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ शुरू करें

नोट: हर महिला की रिकवरी अलग होती है। अगर ब्लीडिंग असामान्य लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान

प्रसव के बाद शारीरिक रिकवरी के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी उतना ही ज़रूरी है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन और चिंता कई महिलाओं को प्रभावित करती है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन

प्रसव के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं को उदासी, चिड़चिड़ापन या अकेलापन महसूस होता है। यह सामान्य है लेकिन अगर 2 सप्ताह से अधिक समय तक यह भावनाएँ बनी रहें तो डॉक्टर से बात करें।

परिवार का सहयोग

नई माँ को परिवार के सहयोग की बहुत ज़रूरत होती है। घर के कामों में मदद लें, बच्चे की देखभाल में साझा करें और माँ को पूरा आराम दें। इससे शारीरिक और मानसिक दोनों रिकवरी तेज़ होती है।

डॉक्टर से कब मिलें

सामान्य ब्लीडिंग धीरे-धीरे कम होती है, लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत चिकित्सा ज़रूरी है:

  • एक घंटे में एक से अधिक पैड भीगना पड़े
  • गोल्फ की गेंद से बड़े थक्के निकलें
  • 6 सप्ताह के बाद भी गहरा लाल रक्तस्राव जारी रहे
  • बुखार हो, 38°C से अधिक तापमान
  • चक्कर आना, धुंधली दिखना या बेहोशी
  • बदबूदार डिस्चार्ज या तेज़ दर्द

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। समय पर इलाज से गंभीर स्थिति को टाला जा सकता है।

निष्कर्ष

प्रसव के बाद ब्लीडिंग एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह में ठीक हो जाती है। सही जानकारी, पौष्टिक आहार, पर्याप्त आराम और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण है। सामान्य ब्लीडिंग और हेमरेज में फर्क समझना बहुत ज़रूरी है — अगर कोई भी चेतावनी संकेत दिखे तो देरी न करें।

संदर्भ

  • American College of Obstetricians and Gynecologists (ACOG) — Practice Bulletin No. 183: Postpartum Hemorrhage (2017)
  • World Health Organization (WHO) — WHO Recommendations for the Prevention and Treatment of Postpartum Haemorrhage (2012, updated 2023)
  • Evensen A, Anderson JM, Fontaine P. Postpartum Hemorrhage: Prevention and Treatment. Am Fam Physician. 2017;95(7):442-449
  • Federation of Obstetric and Gynaecological Societies of India (FOGSI) — Guidelines on Prevention and Management of PPH (2021)
  • Mousa HA, Blum J, Abou El Senoun G, et al. Treatment for primary postpartum haemorrhage. Cochrane Database Syst Rev. 2014;(2):CD003249
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Written by Teddyy Editorial Team
Maternal and Baby Care Content Specialist at Teddyy Diapers | Backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd (WHO & GMP Certified) with 25+ years of expertise in infant care and hygiene products. Our content is reviewed by parenting specialists.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कितने दिन तक रहती है?

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग (लोशिया) सामान्य रूप से 4 से 6 हफ्तों तक रहती है, और कुछ मामलों में यह 8 हफ्तों तक भी जारी रह सकती है।

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग के कौन-कौन से चरण होते हैं?

  1. पहला चरण: डिलीवरी के बाद कुछ दिनों तक लाल रंग का खून निकलता है।
  2. दूसरा चरण: कुछ दिनों बाद खून गुलाबी या भूरे रंग का हो जाता है।
  3. तीसरा चरण: अंत में पीले या सफेद रंग का डिस्चार्ज होता है, जो धीरे-धीरे बंद हो जाता है।

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग को नियंत्रित करने के घरेलू उपाय क्या हैं?

  1. ज्यादा आराम करें और भारी काम न करें।
  2. सैनिटरी पैड का उपयोग करें, टैम्पोन नहीं।
  3. डिस्चार्ज के रंग और मात्रा पर ध्यान दें।
  4. पर्याप्त पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें —

  1. एक घंटे में पैड पूरी तरह भीग जाए।
  2. ब्लीडिंग कम होने के बजाय बढ़ने लगे।
  3. बड़े थक्के, चक्कर आना, या बदबूदार डिस्चार्ज हो।

क्या सी-सेक्शन के बाद भी ब्लीडिंग होती है?

हाँ, सी-सेक्शन के बाद भी कुछ दिनों तक ब्लीडिंग होती है। हालांकि, इसका फ्लो थोड़ा हल्का हो सकता है और रिकवरी में थोड़ा समय लग सकता है।

क्या ब्लीडिंग को जल्दी रोकने का कोई तरीका है?

ब्लीडिंग अपने आप धीरे-धीरे कम होती है, लेकिन इसे नियंत्रित रखने के लिए —

  1. हल्की वॉक करें (डॉक्टर की अनुमति के बाद)।
  2. भारी वजन उठाने से बचें।
  3. पानी पिएं और आयरन से भरपूर आहार लें।
  4. डॉक्टर की सलाह का पालन करें।